अभिप्रेरणा की गतिशील प्रकृति DYNAMIC NATURE OF MOTIVATION IN HINDI

अभिप्रेरणा का अर्थ है, व्यक्तियों के भीतर कोई भावना या इच्छा  जो उन्हें कार्य  के लिए प्रेरित करते हैं। यह प्रकृति में गतिशील माना जाता है क्योंकि यह जीवन के अनुभवों के अनुसार लगातार बदलता रहता है। व्यक्ति की शारीरिक स्थिति, सामाजिक दायरे, पर्यावरण और अन्य अनुभवों के कारण आवश्यकताएं और लक्ष्य लगातार बदलते रहते  हैं। जब एक लक्ष्य प्राप्त होता है, तो व्यक्ति  एक नए को प्राप्त करने की कोशिश करता है। यदि वह उन लक्ष्यों को प्राप्त करने में असमर्थ हैं, फिर  या तो वे उन लक्ष्यों के लिए अनवरत  प्रयास करते रहते हैं या स्थानापन्न लक्ष्य का पता लगाते हैं। मनोवैज्ञानिकों ने इस कथन का समर्थन करने के लिए कुछ कारण दिए हैं “आवश्यकताएं और लक्ष्य लगातार  बदलते रहते हैं” इसके निम्न कारण हो सकते हैं

1. किसी व्यक्ति की मौजूदा ज़रूरतें पूरी तरह से कभी संतुष्ट नहीं होती हैं;

मानव की अधिकांश आवश्यकताएं कभी भी स्थायी रूप से पूरी नहीं होती हैं। हमारे परिवेश में ऐसे कई उदाहरण हैं जिसमें  अस्थायी लक्ष्य उपलब्धि व्यक्ति को पूरी तरह से संतुष्ट नहीं करते हैं और हर व्यक्ति  उस ज़रूरत को पूरी तरह से पूरा करने के लिए लगातार  प्रयास करता रहता है। शारीरिक जरूरतें कभी पूरी तरह से संतुष्ट नहीं होती हैं। सामाजिक मीडिया के माध्यम से लोगों के साथ जुड़े रहना भी इसका अच्छा उदाहरण है | यहां तक ​​कि अगर कोई व्यक्ति फेसबुक में अपने दोस्तों के साथ जुड़ा हुआ है, तो वह अन्य सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर भी तिकड़ी लगाता है। 2.

2. जैसे-जैसे एक की जरूरत पूरी होती है, अगले उच्च स्तर की जरूरत उभरती है।

कुछ खोजकर्ताओं का कहना है कि जेसे ही पुरानी ज़रूरतें पूरी होती हैं नयी ज़रूरते उभरती हैं | प्रेरक सिद्धांतों में, शोधकर्ताओं ने इस  तथ्य का समर्थन किया है कि जैसे ही एक कम स्तर  की ज़रूरत पूरी होती है एक उससे  ऊपर स्तर  की ज़रूरत स्वयं पैदा हो जाती है | ये मानव की प्रकृति में निहित है | मार्केटर्स को लोगों बदलती जरूरतों के बारे में पता होना चाहिए। कार को पहले प्रतिष्ठा का प्रतीक माना जाता था और इसलिए, विपणक उसी तरह से प्रचार कर रहे थे। अब,  लोग सुरक्षा पर अधिक जोर देते हैं तो विपणक भी सुरक्षा के बारे में ही अधिक ध्यान देते हैं |

3. एक व्यक्ति जो अपने लक्ष्यों को प्राप्त करता है, अपने लिए नए और उच्च लक्ष्य निर्धारित करता है:

जब कोई व्यक्ति सफलतापूर्वक अपने पुराने ज़रूरतों/लक्ष्यों  को पूरी करता है तो वह नए उच्च लक्ष्य निर्धारित करता है |  इसका मतलब है कि वे अपनी आकांक्षा के स्तर को बढ़ाते हैं। पिछले लक्ष्यों में सफलता उन्हें उच्च लक्ष्यों तक पहुंचने के लिए आत्मविश्वास देती है।जैसे  एक व्यक्ति ने परिवहन के लिए बाइक खरीदने का लक्ष्य निर्धारित किया है , एक बार जब वह बाइक खरीदता है तो वह कार खरीदने का प्रयास करता है।